लोकसभा चुनाव में चुनाव कमीशन ने किए सख्त नियम लागू 1 महीने तक चलेगा चुनावी समर

लोकसभा चुनाव में चुनाव कमीशन ने किए सख्त नियम लागू 1 महीने तक चलेगा चुनावी समर
 लोकसभा चुनाव में चुनाव कमीशन ने किए सख्त नियम लागू 1 महीने तक चलेगा चुनावी समर

चुनाव आयोग (Election Commision) द्वारा रविवार को बहुप्रतीक्षित 17वीं लोकसभा के चुनाव (Lok Sabha Election) कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही देश में 11 अप्रैल से शुरु होने वाला चुनावी समर एक महीने से अधिक समय तक चलेगा. जिसमें एक ओर भाजपा फिर से सत्तारूढ़ होने का हरसंभव प्रयास करेगी, वहीं विपक्षी दल एकजुट होकर मोदी सरकार को सत्ता से बेदखल करने की भरसक कोशिश करेंगे. आयोग ने लोकसभा और चार राज्यों- आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा और सिक्किम में विधानसभा के चुनाव का कार्यक्रम घोषित दिया है. इसके तहत सात चरणों में 11 अप्रैल से 19 मई तक होने वाले मतदान के बाद 23 मई को मतगणना होगी. बता दें, साल 2014 में 16वीं लोकसभा का चुनाव नौ चरण में कराया गया था. 2019 के लोकसभा चुनाव में आपको कई नियम और प्रावधान पहली बार देखने को मिलेंगे. इस बार उम्मीदवारों को विज्ञापन देकर अपना आपराधिक रिकॉर्ड बताना होगा. इसके साथ ही उन्हें सोशल मीडिया अकांउट की जानकारी देना होगी.इस बार क्या होगा नया? चुनाव आयोग ने चुनाव अभियान में सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल के मद्देनजर चुनाव के दौरान इसके दुरुपयोग से फर्जी खबरों और गलत जानकारियों के प्रसार एवं छद्म प्रचार को रोकने के लिये आगामी लोकसभा चुनाव में सख्त प्रावधान किए हैं.  मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने बताया कि इस चुनाव में हिस्सा लेने वाले सभी उम्मीदवारों को अपने सोशल मीडिया अकांउट की जानकारी आयोग को देनी होगी. चुनाव में सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने के लिये आयोग ने लोकसभा चुनाव में पहली बार यह पहल की है. इससे पहले पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में भी यह व्यवस्था की गयी थी.  चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव में उम्मीदवारों के लिए अपने आपराधिक रिकॉर्ड को कम से कम तीन बार अखबार तथा टीवी पर विज्ञापित करना अनिवार्य किया है. इस संबंध में निर्देश 10 अक्टूबर 2018 को जारी किए गए थे, लेकिन 11 अप्रैल से 19 मई तक होने वाले इस लोकसभा चुनाव में पहली बार इस नियम का इस्तेमाल किया जाएगा.  निर्देशों के अनुसार, राजनीतिक दलों को भी अपने उम्मीदवारों के आपराधिक रिकॉर्ड का विज्ञापन देना होगा. इसका मतलब है कि चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों और पार्टियों को प्रचार अवधि के दौरान व्यापक रूप से प्रसारित समाचार पत्रों तथा लोकप्रिय टीवी चैनलों में कम से कम तीन अलग-अलग तारीखों पर अपने आपराधिक रिकॉर्ड को सार्वजनिक करना होगा.जिन उम्मीदवारों का आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें इस बात का उल्लेख करना होगा.  चुनाव आयोग ने कहा कि पार्टियों को अपने उम्मीदवारों के बारे में अपनी वेबसाइट पर जानकारी देना अनिवार्य होगा. हालांकि, चुनाव आयोग ने यह नहीं बताया कि क्या उम्मीदवारों को प्रचार के लिए अपनी जेब से भुगतान करना होगा.  चुनाव आयोग ने बताया कि शुचिता बरकरार रखने में जनता की भागीदारी को भी सुनिश्चित करने के लिए पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर मोबाइल ऐप ‘सी-विजल' का इस्तेमाल किया जायेगा. इसके जरिए कोई भी नागरिक निर्वाचन नियमों के उल्लंघन की शिकायत कर सकेगा. इस पर संबद्ध प्राधिकारी को 100 मिनट के भीतर कार्रवाई करना अनिवार्य है. इससे पहले पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में इस ऐप का सफलतापूर्वक प्रयोग किया गया था.  चुनाव आयोग लोकसभा चुनावों से पहले फर्जी खबरों (फेक न्यूज) पर नजर रखने और अभद्र भाषा के इस्तेमाल पर लगाम लगाने के लिए सोशल मीडिया साइटें ‘तथ्यों की जांच-परख करने वालों' को तैनात करेगी.  मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने कहा कि सोशल मीडिया के हर प्लैटफॉर्म ने ऐसा तंत्र बनाया है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान सिर्फ उन्हीं राजनीतिक विज्ञापनों को स्वीकार किया जाएगा, जो पहले से प्रमाणित हों. वे इस मद में हुए खर्च का ब्योरा भी चुनाव अधिकारियों से साझा करेंगे.  चुनाव आयोग ने कहा कि ईवीएम और पोस्टल बैलट पेपरों पर सभी उम्मीदवारों की तस्वीरें होंगी ताकि वोटर चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे नेताओं की पहचान कर सकें. आयोग ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) की बैलट इकाइयों और पोस्टल बैलट पेपरों पर तस्वीरें छपी होंगी. इसके लिए उम्मीदवारों को आयोग की ओर से निर्धारित शर्तों पर अमल करते हुए निर्वाचन अधिकारी के पास अपनी हालिया स्टैंन साइज तस्वीर देनी होगी.  चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि पहली बार 2009 के चुनावों के समय फोटो युक्त मतदाता सूची का इस्तेमाल किया गया था. उस वर्ष असम, जम्मू-कश्मीर और नगालैंड में फोटो युक्त मतदाता सूची नहीं थी जबकि असम एवं नगालैंड में मतदाता फोटो पहचान-पत्र (एपिक) नहीं बांटे गए थे.अब सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में फोटो युक्त मतदाता सूची है और 99.72 फीसदी मतदाताओं की तस्वीरें मतदाता सूची में पहले से चस्पा हैं. इसके अलावा, 99.36 फीसदी मतदाताओं को एपिक दिए गए हैं. (इनपुट- एजेंसियां) COMMENT सबस्क्राइब लड़की का दावा है कि वह रोज़ाना अपना वजन कम कर रही हैGreen Coffee Beans Sponsored Let Retirement Planning be a Smooth Ride!HDFC Bank Sponsored Big Sale on Latest collection of Men's Rado Watches, Pay At COD, Free Shipping, With WarrantyDealend Sponsored डॉक्टरों ने तेजी से वजन घटाने का एक रहस्य का अनावरण कियाNutralogix Sponsored Shop Now Luxury watches and get the latest style.Offer For Limited Period.Luxurycraft Sponsored अपने बालों को फिर से बढ़ाने के लिए इसका प्रयोग करेंHair Regain Sponsored Watch: MS Dhoni Produces Moment Of Magic To Run Out Glenn Maxwell VIDEO: पति के पैर दबाते हुए पत्नी ने किया ऐसा, हंसी नहीं रोक पाएंगे आपNDTVIndia दरवाजा बंद करके लड़कियां कर रही थी कुछ ऐसा, मां ने अंदर घुसकर मारी चप्पलेंNDTVIndia पंजाब में बहन ने सगे भाई से रचाई शादी, जिसने भी सुना रह गया हैरान, ये थी पीछे की वजहNDTVIndia बेटी इरा के साथ आमिर खान ने डाली तस्वीर, ट्रोलर्स ने बताया- आपत्तिजनक!NDTVIndia Get ₹5 Lacs Health 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Mar 11 2019 7:37AM
लोकसभा चुनाव में चुनाव कमीशन ने किए सख्त नियम लागू 1 महीने तक चलेगा चुनावी समर
Source: Phagwara Express News
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